भारतीय शादियाँ ख़ुशियों से भरी होती हैं — और महँगी भी। कई परिवार ख़र्च का कुछ हिस्सा बचत से और बाकी पर्सनल लोन से पूरा करते हैं, ताकि जश्न में इमरजेंसी फ़ंड ख़ाली न हो।
शादी के लोन से क्या-क्या कवर होता है
शादी का लोन असल में शादी के ख़र्चों के लिए लिया गया पर्सनल लोन है। यह आम तौर पर बिना गिरवी होता है और किसी एक ख़रीद से बँधा नहीं, इसलिए इससे ये ख़र्च पूरे हो सकते हैं:
- वेन्यू, सजावट और कैटरिंग
- गहने और कपड़े
- फ़ोटोग्राफ़ी और मनोरंजन
- यात्रा, मेहमानों का ठहरना और हनीमून
- वेंडरों को एडवांस
पहले बजट बनाएँ
- हर ख़र्च और उसकी तारीख़ लिखें — वेंडर अक्सर महीनों पहले एडवांस माँगते हैं।
- तय करें कि बचत से कितना होगा और सिर्फ़ कमी के लिए लोन लें।
- देर से आने वाले ख़र्चों के लिए लगभग 10% अतिरिक्त रखें।
- शादी के बाद आराम से भर सकें, ऐसी EMI तय करें — तब घर का बजट बदल सकता है। EMI कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
समझदारी से लोन लेने के सुझाव
- बड़े एडवांस से थोड़ा पहले आवेदन करें, ताकि ज़रूरत के समय पैसा खाते में हो।
- सही अवधि चुनें — लंबी अवधि में EMI कम पर ब्याज ज़्यादा।
- पूरी लागत मिलाएँ — ब्याज, प्रोसेसिंग फ़ीस और GST, जैसा लेंडर के Key Fact Statement में लिखा हो।
- पूरा न चुका सकें तो शादी का ख़र्च क्रेडिट कार्ड पर न रखें — कार्ड का ब्याज कहीं ज़्यादा होता है।
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