ऊपर के कैलकुलेटर में लोन की रकम, सालाना ब्याज दर और अवधि (महीनों में) बदलकर देखें — मासिक EMI, कुल ब्याज और कुल भुगतान तुरंत बदलते हैं।
EMI कैसे निकलती है
P लोन की रकम, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n महीनों की संख्या है। यही रिड्यूसिंग बैलेंस तरीका है — हर महीने ब्याज सिर्फ़ बचे हुए मूलधन पर लगता है।
उदाहरण
| रकम | ब्याज दर | अवधि | EMI (लगभग) | कुल ब्याज (लगभग) |
|---|---|---|---|---|
| ₹1,00,000 | 16% | 24 महीने | ₹4,896 | ₹17,511 |
| ₹3,00,000 | 14% | 36 महीने | ₹10,253 | ₹69,118 |
| ₹5,00,000 | 12% | 36 महीने | ₹16,607 | ₹97,858 |
ये दरें सिर्फ़ उदाहरण हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं। आपकी दर आपकी प्रोफ़ाइल पर निर्भर करती है।
सही EMI कैसे चुनें
- कुल EMI आय के आधे से काफ़ी नीचे रखें — घर का ख़र्च, बचत और आपात स्थिति के लिए जगह बचे।
- अवधि का असर समझें — लंबी अवधि में EMI कम, पर कुल ब्याज ज़्यादा।
- फ़ीस जोड़ें — प्रोसेसिंग फ़ीस और GST भी लागत का हिस्सा हैं; लेंडर के Key Fact Statement में APR देखें।
- EMI की तारीख़ सैलरी के बाद रखें ताकि बाउंस न हो।
विस्तार से पढ़ें: EMI कैसे कैलकुलेट करें। अपनी योग्यता के लिए योग्यता की शर्तें देखें।

