अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹75 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹2,42,004 | ₹12,12,141 | ₹87,12,141 |
| 12% | ₹2,49,107 | ₹14,67,864 | ₹89,67,864 |
| 14% | ₹2,56,332 | ₹17,27,960 | ₹92,27,960 |
| 16% | ₹2,63,678 | ₹19,92,399 | ₹94,92,399 |
| 18% | ₹2,71,143 | ₹22,61,147 | ₹97,61,147 |
| 20% | ₹2,78,727 | ₹25,34,168 | ₹1,00,34,168 |
| 22% | ₹2,86,428 | ₹28,11,422 | ₹1,03,11,422 |
| 24% | ₹2,94,246 | ₹30,92,870 | ₹1,05,92,870 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹22,08,117 | ₹7,81,171 | ₹52,91,883 |
| साल 2 | ₹24,88,161 | ₹5,01,127 | ₹28,03,722 |
| साल 3 | ₹28,03,722 | ₹1,85,566 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹7,81,171 और आख़िरी का लगभग ₹1,85,566। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹75 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 2 साल | ₹3,53,051 | ₹9,73,225 |
| 3 साल | ₹2,49,107 | ₹14,67,864 |
| 5 साल | ₹1,66,833 | ₹25,10,001 |
| 7 साल | ₹1,32,395 | ₹36,21,222 |
| 10 साल | ₹1,07,603 | ₹54,12,385 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹4,94,639 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹10,42,138 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹40 लाख | ₹1,32,857 | ₹7,82,861 |
| ₹50 लाख | ₹1,66,072 | ₹9,78,576 |
| ₹75 लाख | ₹2,49,107 | ₹14,67,864 |
| ₹1 करोड़ | ₹3,32,143 | ₹19,57,152 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹2,49,107 की EMI लगभग ₹4,99,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

