अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹50 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹1,61,336 | ₹8,08,094 | ₹58,08,094 |
| 12% | ₹1,66,072 | ₹9,78,576 | ₹59,78,576 |
| 14% | ₹1,70,888 | ₹11,51,973 | ₹61,51,973 |
| 16% | ₹1,75,785 | ₹13,28,266 | ₹63,28,266 |
| 18% | ₹1,80,762 | ₹15,07,431 | ₹65,07,431 |
| 20% | ₹1,85,818 | ₹16,89,445 | ₹66,89,445 |
| 22% | ₹1,90,952 | ₹18,74,282 | ₹68,74,282 |
| 24% | ₹1,96,164 | ₹20,61,913 | ₹70,61,913 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹14,72,078 | ₹5,20,781 | ₹35,27,922 |
| साल 2 | ₹16,58,774 | ₹3,34,085 | ₹18,69,148 |
| साल 3 | ₹18,69,148 | ₹1,23,710 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹5,20,781 और आख़िरी का लगभग ₹1,23,710। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹50 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 2 साल | ₹2,35,367 | ₹6,48,817 |
| 3 साल | ₹1,66,072 | ₹9,78,576 |
| 5 साल | ₹1,11,222 | ₹16,73,334 |
| 7 साल | ₹88,264 | ₹24,14,148 |
| 10 साल | ₹71,735 | ₹36,08,257 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹3,29,759 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹6,94,759 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹30 लाख | ₹99,643 | ₹5,87,145 |
| ₹40 लाख | ₹1,32,857 | ₹7,82,861 |
| ₹50 लाख | ₹1,66,072 | ₹9,78,576 |
| ₹75 लाख | ₹2,49,107 | ₹14,67,864 |
| ₹1 करोड़ | ₹3,32,143 | ₹19,57,152 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹1,66,072 की EMI लगभग ₹3,33,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

