अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹7.5 लाख की 5 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹15,935 | ₹2,06,117 | ₹9,56,117 |
| 12% | ₹16,683 | ₹2,51,000 | ₹10,01,000 |
| 14% | ₹17,451 | ₹2,97,071 | ₹10,47,071 |
| 16% | ₹18,239 | ₹3,44,313 | ₹10,94,313 |
| 18% | ₹19,045 | ₹3,92,704 | ₹11,42,704 |
| 20% | ₹19,870 | ₹4,42,225 | ₹11,92,225 |
| 22% | ₹20,714 | ₹4,92,851 | ₹12,42,851 |
| 24% | ₹21,576 | ₹5,44,558 | ₹12,94,558 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹1,11,382 | ₹98,033 | ₹6,38,618 |
| साल 2 | ₹1,28,016 | ₹81,399 | ₹5,10,603 |
| साल 3 | ₹1,47,134 | ₹62,280 | ₹3,63,469 |
| साल 4 | ₹1,69,107 | ₹40,307 | ₹1,94,362 |
| साल 5 | ₹1,94,362 | ₹15,052 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹98,033 और आख़िरी का लगभग ₹15,052। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹7.5 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹67,340 | ₹58,084 |
| 2 साल | ₹36,010 | ₹1,14,232 |
| 3 साल | ₹25,633 | ₹1,72,796 |
| 4 साल | ₹20,495 | ₹2,33,753 |
| 5 साल | ₹17,451 | ₹2,97,071 |
| 7 साल | ₹14,055 | ₹4,30,621 |
4 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹63,318 ब्याज बचता है। 7 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,33,549 ब्याज बढ़ जाता है।
5 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹6 लाख | ₹13,961 | ₹2,37,657 |
| ₹7 लाख | ₹16,288 | ₹2,77,267 |
| ₹7.5 लाख | ₹17,451 | ₹2,97,071 |
| ₹8 लाख | ₹18,615 | ₹3,16,876 |
| ₹10 लाख | ₹23,268 | ₹3,96,095 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹17,451 की EMI लगभग ₹35,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

