अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹10 लाख की 5 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹21,247 | ₹2,74,823 | ₹12,74,823 |
| 12% | ₹22,244 | ₹3,34,667 | ₹13,34,667 |
| 14% | ₹23,268 | ₹3,96,095 | ₹13,96,095 |
| 16% | ₹24,318 | ₹4,59,083 | ₹14,59,083 |
| 18% | ₹25,393 | ₹5,23,606 | ₹15,23,606 |
| 20% | ₹26,494 | ₹5,89,633 | ₹15,89,633 |
| 22% | ₹27,619 | ₹6,57,135 | ₹16,57,135 |
| 24% | ₹28,768 | ₹7,26,078 | ₹17,26,078 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹1,55,290 | ₹1,11,643 | ₹8,44,710 |
| साल 2 | ₹1,74,985 | ₹91,948 | ₹6,69,725 |
| साल 3 | ₹1,97,177 | ₹69,756 | ₹4,72,547 |
| साल 4 | ₹2,22,184 | ₹44,749 | ₹2,50,363 |
| साल 5 | ₹2,50,363 | ₹16,570 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,11,643 और आख़िरी का लगभग ₹16,570। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹10 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹88,849 | ₹66,185 |
| 2 साल | ₹47,073 | ₹1,29,763 |
| 3 साल | ₹33,214 | ₹1,95,715 |
| 5 साल | ₹22,244 | ₹3,34,667 |
| 7 साल | ₹17,653 | ₹4,82,830 |
| 10 साल | ₹14,347 | ₹7,21,651 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹1,38,952 ब्याज बचता है। 7 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,48,163 ब्याज बढ़ जाता है।
5 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹7.5 लाख | ₹16,683 | ₹2,51,000 |
| ₹8 लाख | ₹17,796 | ₹2,67,733 |
| ₹10 लाख | ₹22,244 | ₹3,34,667 |
| ₹12 लाख | ₹26,693 | ₹4,01,600 |
| ₹15 लाख | ₹33,367 | ₹5,02,000 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹22,244 की EMI लगभग ₹45,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

