अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹10 लाख की 10 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹13,215 | ₹5,85,809 | ₹15,85,809 |
| 12% | ₹14,347 | ₹7,21,651 | ₹17,21,651 |
| 14% | ₹15,527 | ₹8,63,197 | ₹18,63,197 |
| 16% | ₹16,751 | ₹10,10,157 | ₹20,10,157 |
| 18% | ₹18,019 | ₹11,62,222 | ₹21,62,222 |
| 20% | ₹19,326 | ₹13,19,068 | ₹23,19,068 |
| 22% | ₹20,670 | ₹14,80,363 | ₹24,80,363 |
| 24% | ₹22,048 | ₹16,45,772 | ₹26,45,772 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹55,132 | ₹1,17,033 | ₹9,44,868 |
| साल 2 | ₹62,124 | ₹1,10,041 | ₹8,82,744 |
| साल 3 | ₹70,003 | ₹1,02,162 | ₹8,12,741 |
| साल 4 | ₹78,881 | ₹93,284 | ₹7,33,860 |
| साल 5 | ₹88,885 | ₹83,280 | ₹6,44,974 |
| साल 6 | ₹1,00,158 | ₹72,007 | ₹5,44,816 |
| साल 7 | ₹1,12,861 | ₹59,304 | ₹4,31,955 |
| साल 8 | ₹1,27,174 | ₹44,991 | ₹3,04,781 |
| साल 9 | ₹1,43,303 | ₹28,862 | ₹1,61,478 |
| साल 10 | ₹1,61,478 | ₹10,687 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,17,033 और आख़िरी का लगभग ₹10,687। आधा लोन लगभग साल 7 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹10 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹88,849 | ₹66,185 |
| 2 साल | ₹47,073 | ₹1,29,763 |
| 3 साल | ₹33,214 | ₹1,95,715 |
| 5 साल | ₹22,244 | ₹3,34,667 |
| 7 साल | ₹17,653 | ₹4,82,830 |
| 10 साल | ₹14,347 | ₹7,21,651 |
7 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹2,38,822 ब्याज बचता है।
10 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹14,347 की EMI लगभग ₹29,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

