अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹7.5 लाख की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹19,022 | ₹1,63,053 | ₹9,13,053 |
| 12% | ₹19,750 | ₹1,98,018 | ₹9,48,018 |
| 14% | ₹20,495 | ₹2,33,753 | ₹9,83,753 |
| 16% | ₹21,255 | ₹2,70,250 | ₹10,20,250 |
| 18% | ₹22,031 | ₹3,07,500 | ₹10,57,500 |
| 20% | ₹22,823 | ₹3,45,493 | ₹10,95,493 |
| 22% | ₹23,630 | ₹3,84,219 | ₹11,34,219 |
| 24% | ₹24,451 | ₹4,23,666 | ₹11,73,666 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹1,50,343 | ₹95,595 | ₹5,99,657 |
| साल 2 | ₹1,72,795 | ₹73,143 | ₹4,26,862 |
| साल 3 | ₹1,98,601 | ₹47,337 | ₹2,28,261 |
| साल 4 | ₹2,28,261 | ₹17,678 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹95,595 और आख़िरी का लगभग ₹17,678। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹7.5 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹67,340 | ₹58,084 |
| 2 साल | ₹36,010 | ₹1,14,232 |
| 3 साल | ₹25,633 | ₹1,72,796 |
| 4 साल | ₹20,495 | ₹2,33,753 |
| 5 साल | ₹17,451 | ₹2,97,071 |
| 7 साल | ₹14,055 | ₹4,30,621 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹60,957 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹63,318 ब्याज बढ़ जाता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹6 लाख | ₹16,396 | ₹1,87,003 |
| ₹7 लाख | ₹19,129 | ₹2,18,170 |
| ₹7.5 लाख | ₹20,495 | ₹2,33,753 |
| ₹8 लाख | ₹21,861 | ₹2,49,337 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹20,495 की EMI लगभग ₹41,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

