अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹7 लाख की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹17,754 | ₹1,52,183 | ₹8,52,183 |
| 12% | ₹18,434 | ₹1,84,817 | ₹8,84,817 |
| 14% | ₹19,129 | ₹2,18,170 | ₹9,18,170 |
| 16% | ₹19,838 | ₹2,52,233 | ₹9,52,233 |
| 18% | ₹20,562 | ₹2,87,000 | ₹9,87,000 |
| 20% | ₹21,301 | ₹3,22,460 | ₹10,22,460 |
| 22% | ₹22,054 | ₹3,58,604 | ₹10,58,604 |
| 24% | ₹22,821 | ₹3,95,422 | ₹10,95,422 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹1,40,320 | ₹89,222 | ₹5,59,680 |
| साल 2 | ₹1,61,276 | ₹68,267 | ₹3,98,404 |
| साल 3 | ₹1,85,361 | ₹44,181 | ₹2,13,043 |
| साल 4 | ₹2,13,043 | ₹16,499 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹89,222 और आख़िरी का लगभग ₹16,499। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹7 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹62,851 | ₹54,212 |
| 2 साल | ₹33,609 | ₹1,06,616 |
| 3 साल | ₹23,924 | ₹1,61,276 |
| 4 साल | ₹19,129 | ₹2,18,170 |
| 5 साल | ₹16,288 | ₹2,77,267 |
| 7 साल | ₹13,118 | ₹4,01,913 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹56,893 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹59,097 ब्याज बढ़ जाता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹5 लाख | ₹13,663 | ₹1,55,835 |
| ₹6 लाख | ₹16,396 | ₹1,87,003 |
| ₹7 लाख | ₹19,129 | ₹2,18,170 |
| ₹7.5 लाख | ₹20,495 | ₹2,33,753 |
| ₹8 लाख | ₹21,861 | ₹2,49,337 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹19,129 की EMI लगभग ₹39,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

