अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹7 लाख की 7 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹11,621 | ₹2,76,150 | ₹9,76,150 |
| 12% | ₹12,357 | ₹3,37,981 | ₹10,37,981 |
| 14% | ₹13,118 | ₹4,01,913 | ₹11,01,913 |
| 16% | ₹13,903 | ₹4,67,889 | ₹11,67,889 |
| 18% | ₹14,712 | ₹5,35,849 | ₹12,35,849 |
| 20% | ₹15,544 | ₹6,05,725 | ₹13,05,725 |
| 22% | ₹16,398 | ₹6,77,446 | ₹13,77,446 |
| 24% | ₹17,273 | ₹7,50,938 | ₹14,50,938 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹63,381 | ₹94,035 | ₹6,36,619 |
| साल 2 | ₹72,846 | ₹84,570 | ₹5,63,773 |
| साल 3 | ₹83,725 | ₹73,691 | ₹4,80,048 |
| साल 4 | ₹96,229 | ₹61,187 | ₹3,83,819 |
| साल 5 | ₹1,10,600 | ₹46,816 | ₹2,73,219 |
| साल 6 | ₹1,27,117 | ₹30,299 | ₹1,46,101 |
| साल 7 | ₹1,46,101 | ₹11,315 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹94,035 और आख़िरी का लगभग ₹11,315। आधा लोन लगभग साल 5 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹7 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹62,851 | ₹54,212 |
| 2 साल | ₹33,609 | ₹1,06,616 |
| 3 साल | ₹23,924 | ₹1,61,276 |
| 4 साल | ₹19,129 | ₹2,18,170 |
| 5 साल | ₹16,288 | ₹2,77,267 |
| 7 साल | ₹13,118 | ₹4,01,913 |
5 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹1,24,646 ब्याज बचता है।
7 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹5 लाख | ₹9,370 | ₹2,87,080 |
| ₹6 लाख | ₹11,244 | ₹3,44,497 |
| ₹7 लाख | ₹13,118 | ₹4,01,913 |
| ₹7.5 लाख | ₹14,055 | ₹4,30,621 |
| ₹8 लाख | ₹14,992 | ₹4,59,329 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹13,118 की EMI लगभग ₹27,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

