अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹8 लाख की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹20,290 | ₹1,73,923 | ₹9,73,923 |
| 12% | ₹21,067 | ₹2,11,219 | ₹10,11,219 |
| 14% | ₹21,861 | ₹2,49,337 | ₹10,49,337 |
| 16% | ₹22,672 | ₹2,88,267 | ₹10,88,267 |
| 18% | ₹23,500 | ₹3,28,000 | ₹11,28,000 |
| 20% | ₹24,344 | ₹3,68,526 | ₹11,68,526 |
| 22% | ₹25,205 | ₹4,09,833 | ₹12,09,833 |
| 24% | ₹26,081 | ₹4,51,910 | ₹12,51,910 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹1,60,366 | ₹1,01,968 | ₹6,39,634 |
| साल 2 | ₹1,84,315 | ₹78,019 | ₹4,55,319 |
| साल 3 | ₹2,11,841 | ₹50,493 | ₹2,43,478 |
| साल 4 | ₹2,43,478 | ₹18,856 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,01,968 और आख़िरी का लगभग ₹18,856। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹8 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹71,830 | ₹61,956 |
| 2 साल | ₹38,410 | ₹1,21,847 |
| 3 साल | ₹27,342 | ₹1,84,316 |
| 4 साल | ₹21,861 | ₹2,49,337 |
| 5 साल | ₹18,615 | ₹3,16,876 |
| 7 साल | ₹14,992 | ₹4,59,329 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹65,021 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹67,539 ब्याज बढ़ जाता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹21,861 की EMI लगभग ₹44,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

