अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹7.5 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹24,200 | ₹1,21,214 | ₹8,71,214 |
| 12% | ₹24,911 | ₹1,46,786 | ₹8,96,786 |
| 14% | ₹25,633 | ₹1,72,796 | ₹9,22,796 |
| 16% | ₹26,368 | ₹1,99,240 | ₹9,49,240 |
| 18% | ₹27,114 | ₹2,26,115 | ₹9,76,115 |
| 20% | ₹27,873 | ₹2,53,417 | ₹10,03,417 |
| 22% | ₹28,643 | ₹2,81,142 | ₹10,31,142 |
| 24% | ₹29,425 | ₹3,09,287 | ₹10,59,287 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹2,16,118 | ₹91,481 | ₹5,33,882 |
| साल 2 | ₹2,48,393 | ₹59,205 | ₹2,85,489 |
| साल 3 | ₹2,85,489 | ₹22,110 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹91,481 और आख़िरी का लगभग ₹22,110। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹7.5 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹67,340 | ₹58,084 |
| 2 साल | ₹36,010 | ₹1,14,232 |
| 3 साल | ₹25,633 | ₹1,72,796 |
| 4 साल | ₹20,495 | ₹2,33,753 |
| 5 साल | ₹17,451 | ₹2,97,071 |
| 7 साल | ₹14,055 | ₹4,30,621 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹58,564 ब्याज बचता है। 4 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹60,957 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹6 लाख | ₹20,507 | ₹1,38,237 |
| ₹7 लाख | ₹23,924 | ₹1,61,276 |
| ₹7.5 लाख | ₹25,633 | ₹1,72,796 |
| ₹8 लाख | ₹27,342 | ₹1,84,316 |
| ₹10 लाख | ₹34,178 | ₹2,30,395 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹25,633 की EMI लगभग ₹52,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

