अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹6 लाख की 5 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹12,748 | ₹1,64,894 | ₹7,64,894 |
| 12% | ₹13,347 | ₹2,00,800 | ₹8,00,800 |
| 14% | ₹13,961 | ₹2,37,657 | ₹8,37,657 |
| 16% | ₹14,591 | ₹2,75,450 | ₹8,75,450 |
| 18% | ₹15,236 | ₹3,14,163 | ₹9,14,163 |
| 20% | ₹15,896 | ₹3,53,780 | ₹9,53,780 |
| 22% | ₹16,571 | ₹3,94,281 | ₹9,94,281 |
| 24% | ₹17,261 | ₹4,35,647 | ₹10,35,647 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹89,105 | ₹78,426 | ₹5,10,895 |
| साल 2 | ₹1,02,413 | ₹65,119 | ₹4,08,482 |
| साल 3 | ₹1,17,707 | ₹49,824 | ₹2,90,775 |
| साल 4 | ₹1,35,286 | ₹32,246 | ₹1,55,489 |
| साल 5 | ₹1,55,489 | ₹12,042 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹78,426 और आख़िरी का लगभग ₹12,042। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹6 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹53,872 | ₹46,467 |
| 2 साल | ₹28,808 | ₹91,386 |
| 3 साल | ₹20,507 | ₹1,38,237 |
| 4 साल | ₹16,396 | ₹1,87,003 |
| 5 साल | ₹13,961 | ₹2,37,657 |
| 7 साल | ₹11,244 | ₹3,44,497 |
4 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹50,655 ब्याज बचता है। 7 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,06,840 ब्याज बढ़ जाता है।
5 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹4 लाख | ₹9,307 | ₹1,58,438 |
| ₹5 लाख | ₹11,634 | ₹1,98,048 |
| ₹6 लाख | ₹13,961 | ₹2,37,657 |
| ₹7 लाख | ₹16,288 | ₹2,77,267 |
| ₹7.5 लाख | ₹17,451 | ₹2,97,071 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹13,961 की EMI लगभग ₹28,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

