अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹40,000 की 1 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹3,517 | ₹2,200 | ₹42,200 |
| 12% | ₹3,554 | ₹2,647 | ₹42,647 |
| 14% | ₹3,591 | ₹3,098 | ₹43,098 |
| 16% | ₹3,629 | ₹3,551 | ₹43,551 |
| 18% | ₹3,667 | ₹4,006 | ₹44,006 |
| 20% | ₹3,705 | ₹4,465 | ₹44,465 |
| 22% | ₹3,744 | ₹4,925 | ₹44,925 |
| 24% | ₹3,782 | ₹5,389 | ₹45,389 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹3,096 | ₹533 | ₹36,904 |
| महीना 2 | ₹3,137 | ₹492 | ₹33,767 |
| महीना 3 | ₹3,179 | ₹450 | ₹30,588 |
| महीना 4 | ₹3,221 | ₹408 | ₹27,367 |
| महीना 5 | ₹3,264 | ₹365 | ₹24,102 |
| महीना 6 | ₹3,308 | ₹321 | ₹20,794 |
| महीना 7 | ₹3,352 | ₹277 | ₹17,442 |
| महीना 8 | ₹3,397 | ₹233 | ₹14,046 |
| महीना 9 | ₹3,442 | ₹187 | ₹10,604 |
| महीना 10 | ₹3,488 | ₹141 | ₹7,116 |
| महीना 11 | ₹3,534 | ₹95 | ₹3,581 |
| महीना 12 | ₹3,581 | ₹48 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹533 और आख़िरी का लगभग ₹48। आधा लोन लगभग महीना 7 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹40,000 दूसरी अवधियों में
6 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹1,664 ब्याज बचता है। 18 महीने करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,706 ब्याज बढ़ जाता है।
1 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹25,000 | ₹2,268 | ₹2,219 |
| ₹30,000 | ₹2,722 | ₹2,663 |
| ₹40,000 | ₹3,629 | ₹3,551 |
| ₹50,000 | ₹4,537 | ₹4,439 |
| ₹60,000 | ₹5,444 | ₹5,326 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹3,629 की EMI लगभग ₹8,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

