अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹40,000 की 6 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹6,862 | ₹1,175 | ₹41,175 |
| 12% | ₹6,902 | ₹1,412 | ₹41,412 |
| 14% | ₹6,942 | ₹1,649 | ₹41,649 |
| 16% | ₹6,981 | ₹1,887 | ₹41,887 |
| 18% | ₹7,021 | ₹2,126 | ₹42,126 |
| 20% | ₹7,061 | ₹2,365 | ₹42,365 |
| 22% | ₹7,101 | ₹2,606 | ₹42,606 |
| 24% | ₹7,141 | ₹2,846 | ₹42,846 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹6,448 | ₹533 | ₹33,552 |
| महीना 2 | ₹6,534 | ₹447 | ₹27,018 |
| महीना 3 | ₹6,621 | ₹360 | ₹20,397 |
| महीना 4 | ₹6,709 | ₹272 | ₹13,688 |
| महीना 5 | ₹6,799 | ₹183 | ₹6,889 |
| महीना 6 | ₹6,889 | ₹92 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹533 और आख़िरी का लगभग ₹92। आधा लोन लगभग महीना 4 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹40,000 दूसरी अवधियों में
1 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,664 ब्याज बढ़ जाता है।
6 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹25,000 | ₹4,363 | ₹1,180 |
| ₹30,000 | ₹5,236 | ₹1,415 |
| ₹40,000 | ₹6,981 | ₹1,887 |
| ₹50,000 | ₹8,727 | ₹2,359 |
| ₹60,000 | ₹10,472 | ₹2,831 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹6,981 की EMI लगभग ₹14,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

