अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹25,000 की 6 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹4,289 | ₹734 | ₹25,734 |
| 12% | ₹4,314 | ₹882 | ₹25,882 |
| 14% | ₹4,338 | ₹1,031 | ₹26,031 |
| 16% | ₹4,363 | ₹1,180 | ₹26,180 |
| 18% | ₹4,388 | ₹1,329 | ₹26,329 |
| 20% | ₹4,413 | ₹1,478 | ₹26,478 |
| 22% | ₹4,438 | ₹1,628 | ₹26,628 |
| 24% | ₹4,463 | ₹1,779 | ₹26,779 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹4,030 | ₹333 | ₹20,970 |
| महीना 2 | ₹4,084 | ₹280 | ₹16,886 |
| महीना 3 | ₹4,138 | ₹225 | ₹12,748 |
| महीना 4 | ₹4,193 | ₹170 | ₹8,555 |
| महीना 5 | ₹4,249 | ₹114 | ₹4,306 |
| महीना 6 | ₹4,306 | ₹57 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹333 और आख़िरी का लगभग ₹57। आधा लोन लगभग महीना 4 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹25,000 दूसरी अवधियों में
1 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,040 ब्याज बढ़ जाता है।
6 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹15,000 | ₹2,618 | ₹708 |
| ₹20,000 | ₹3,491 | ₹944 |
| ₹25,000 | ₹4,363 | ₹1,180 |
| ₹30,000 | ₹5,236 | ₹1,415 |
| ₹40,000 | ₹6,981 | ₹1,887 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹4,363 की EMI लगभग ₹9,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

