अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹30,000 की 6 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹5,147 | ₹881 | ₹30,881 |
| 12% | ₹5,176 | ₹1,059 | ₹31,059 |
| 14% | ₹5,206 | ₹1,237 | ₹31,237 |
| 16% | ₹5,236 | ₹1,415 | ₹31,415 |
| 18% | ₹5,266 | ₹1,595 | ₹31,595 |
| 20% | ₹5,296 | ₹1,774 | ₹31,774 |
| 22% | ₹5,326 | ₹1,954 | ₹31,954 |
| 24% | ₹5,356 | ₹2,135 | ₹32,135 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹4,836 | ₹400 | ₹25,164 |
| महीना 2 | ₹4,900 | ₹336 | ₹20,264 |
| महीना 3 | ₹4,966 | ₹270 | ₹15,298 |
| महीना 4 | ₹5,032 | ₹204 | ₹10,266 |
| महीना 5 | ₹5,099 | ₹137 | ₹5,167 |
| महीना 6 | ₹5,167 | ₹69 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹400 और आख़िरी का लगभग ₹69। आधा लोन लगभग महीना 4 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹30,000 दूसरी अवधियों में
1 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,248 ब्याज बढ़ जाता है।
6 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹3,491 | ₹944 |
| ₹25,000 | ₹4,363 | ₹1,180 |
| ₹30,000 | ₹5,236 | ₹1,415 |
| ₹40,000 | ₹6,981 | ₹1,887 |
| ₹50,000 | ₹8,727 | ₹2,359 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹5,236 की EMI लगभग ₹11,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

