अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹30,000 की 1 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹2,637 | ₹1,650 | ₹31,650 |
| 12% | ₹2,665 | ₹1,986 | ₹31,986 |
| 14% | ₹2,694 | ₹2,323 | ₹32,323 |
| 16% | ₹2,722 | ₹2,663 | ₹32,663 |
| 18% | ₹2,750 | ₹3,005 | ₹33,005 |
| 20% | ₹2,779 | ₹3,348 | ₹33,348 |
| 22% | ₹2,808 | ₹3,694 | ₹33,694 |
| 24% | ₹2,837 | ₹4,041 | ₹34,041 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹2,322 | ₹400 | ₹27,678 |
| महीना 2 | ₹2,353 | ₹369 | ₹25,325 |
| महीना 3 | ₹2,384 | ₹338 | ₹22,941 |
| महीना 4 | ₹2,416 | ₹306 | ₹20,525 |
| महीना 5 | ₹2,448 | ₹274 | ₹18,077 |
| महीना 6 | ₹2,481 | ₹241 | ₹15,596 |
| महीना 7 | ₹2,514 | ₹208 | ₹13,082 |
| महीना 8 | ₹2,548 | ₹174 | ₹10,534 |
| महीना 9 | ₹2,581 | ₹140 | ₹7,953 |
| महीना 10 | ₹2,616 | ₹106 | ₹5,337 |
| महीना 11 | ₹2,651 | ₹71 | ₹2,686 |
| महीना 12 | ₹2,686 | ₹36 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹400 और आख़िरी का लगभग ₹36। आधा लोन लगभग महीना 7 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹30,000 दूसरी अवधियों में
6 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹1,248 ब्याज बचता है। 18 महीने करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,279 ब्याज बढ़ जाता है।
1 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹1,815 | ₹1,775 |
| ₹25,000 | ₹2,268 | ₹2,219 |
| ₹30,000 | ₹2,722 | ₹2,663 |
| ₹40,000 | ₹3,629 | ₹3,551 |
| ₹50,000 | ₹4,537 | ₹4,439 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹2,722 की EMI लगभग ₹6,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

