अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹20,000 की 1 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹1,758 | ₹1,100 | ₹21,100 |
| 12% | ₹1,777 | ₹1,324 | ₹21,324 |
| 14% | ₹1,796 | ₹1,549 | ₹21,549 |
| 16% | ₹1,815 | ₹1,775 | ₹21,775 |
| 18% | ₹1,834 | ₹2,003 | ₹22,003 |
| 20% | ₹1,853 | ₹2,232 | ₹22,232 |
| 22% | ₹1,872 | ₹2,463 | ₹22,463 |
| 24% | ₹1,891 | ₹2,694 | ₹22,694 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹1,548 | ₹267 | ₹18,452 |
| महीना 2 | ₹1,569 | ₹246 | ₹16,883 |
| महीना 3 | ₹1,590 | ₹225 | ₹15,294 |
| महीना 4 | ₹1,611 | ₹204 | ₹13,683 |
| महीना 5 | ₹1,632 | ₹182 | ₹12,051 |
| महीना 6 | ₹1,654 | ₹161 | ₹10,397 |
| महीना 7 | ₹1,676 | ₹139 | ₹8,721 |
| महीना 8 | ₹1,698 | ₹116 | ₹7,023 |
| महीना 9 | ₹1,721 | ₹94 | ₹5,302 |
| महीना 10 | ₹1,744 | ₹71 | ₹3,558 |
| महीना 11 | ₹1,767 | ₹47 | ₹1,791 |
| महीना 12 | ₹1,791 | ₹24 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹267 और आख़िरी का लगभग ₹24। आधा लोन लगभग महीना 7 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹20,000 दूसरी अवधियों में
6 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹832 ब्याज बचता है। 18 महीने करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹853 ब्याज बढ़ जाता है।
1 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹10,000 | ₹907 | ₹888 |
| ₹15,000 | ₹1,361 | ₹1,332 |
| ₹20,000 | ₹1,815 | ₹1,775 |
| ₹25,000 | ₹2,268 | ₹2,219 |
| ₹30,000 | ₹2,722 | ₹2,663 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹1,815 की EMI लगभग ₹4,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

