अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹10,000 की 1 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹879 | ₹550 | ₹10,550 |
| 12% | ₹888 | ₹662 | ₹10,662 |
| 14% | ₹898 | ₹774 | ₹10,774 |
| 16% | ₹907 | ₹888 | ₹10,888 |
| 18% | ₹917 | ₹1,002 | ₹11,002 |
| 20% | ₹926 | ₹1,116 | ₹11,116 |
| 22% | ₹936 | ₹1,231 | ₹11,231 |
| 24% | ₹946 | ₹1,347 | ₹11,347 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹774 | ₹133 | ₹9,226 |
| महीना 2 | ₹784 | ₹123 | ₹8,442 |
| महीना 3 | ₹795 | ₹113 | ₹7,647 |
| महीना 4 | ₹805 | ₹102 | ₹6,842 |
| महीना 5 | ₹816 | ₹91 | ₹6,026 |
| महीना 6 | ₹827 | ₹80 | ₹5,199 |
| महीना 7 | ₹838 | ₹69 | ₹4,361 |
| महीना 8 | ₹849 | ₹58 | ₹3,511 |
| महीना 9 | ₹860 | ₹47 | ₹2,651 |
| महीना 10 | ₹872 | ₹35 | ₹1,779 |
| महीना 11 | ₹884 | ₹24 | ₹895 |
| महीना 12 | ₹895 | ₹12 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹133 और आख़िरी का लगभग ₹12। आधा लोन लगभग महीना 7 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹10,000 दूसरी अवधियों में
6 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹416 ब्याज बचता है। 18 महीने करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹426 ब्याज बढ़ जाता है।
1 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹907 की EMI लगभग ₹2,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

