अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹10,000 की 2 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹461 | ₹1,075 | ₹11,075 |
| 12% | ₹471 | ₹1,298 | ₹11,298 |
| 14% | ₹480 | ₹1,523 | ₹11,523 |
| 16% | ₹490 | ₹1,751 | ₹11,751 |
| 18% | ₹499 | ₹1,982 | ₹11,982 |
| 20% | ₹509 | ₹2,215 | ₹12,215 |
| 22% | ₹519 | ₹2,451 | ₹12,451 |
| 24% | ₹529 | ₹2,689 | ₹12,689 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹356 | ₹133 | ₹9,644 |
| महीना 2 | ₹361 | ₹129 | ₹9,283 |
| महीना 3 | ₹366 | ₹124 | ₹8,917 |
| महीना 4 | ₹371 | ₹119 | ₹8,546 |
| महीना 5 | ₹376 | ₹114 | ₹8,170 |
| महीना 6 | ₹381 | ₹109 | ₹7,790 |
| महीना 7 | ₹386 | ₹104 | ₹7,404 |
| महीना 8 | ₹391 | ₹99 | ₹7,013 |
| महीना 9 | ₹396 | ₹94 | ₹6,617 |
| महीना 10 | ₹401 | ₹88 | ₹6,215 |
| महीना 11 | ₹407 | ₹83 | ₹5,809 |
| महीना 12 | ₹412 | ₹77 | ₹5,397 |
| महीना 13 | ₹418 | ₹72 | ₹4,979 |
| महीना 14 | ₹423 | ₹66 | ₹4,556 |
| महीना 15 | ₹429 | ₹61 | ₹4,127 |
| महीना 16 | ₹435 | ₹55 | ₹3,692 |
| महीना 17 | ₹440 | ₹49 | ₹3,252 |
| महीना 18 | ₹446 | ₹43 | ₹2,805 |
| महीना 19 | ₹452 | ₹37 | ₹2,353 |
| महीना 20 | ₹458 | ₹31 | ₹1,895 |
| महीना 21 | ₹464 | ₹25 | ₹1,431 |
| महीना 22 | ₹471 | ₹19 | ₹960 |
| महीना 23 | ₹477 | ₹13 | ₹483 |
| महीना 24 | ₹483 | ₹6 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹133 और आख़िरी का लगभग ₹6। आधा लोन लगभग महीना 13 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹10,000 दूसरी अवधियों में
18 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹437 ब्याज बचता है।
2 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹490 की EMI लगभग ₹1,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

