अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹15,000 की 2 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹692 | ₹1,612 | ₹16,612 |
| 12% | ₹706 | ₹1,946 | ₹16,946 |
| 14% | ₹720 | ₹2,285 | ₹17,285 |
| 16% | ₹734 | ₹2,627 | ₹17,627 |
| 18% | ₹749 | ₹2,973 | ₹17,973 |
| 20% | ₹763 | ₹3,322 | ₹18,322 |
| 22% | ₹778 | ₹3,676 | ₹18,676 |
| 24% | ₹793 | ₹4,034 | ₹19,034 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹534 | ₹200 | ₹14,466 |
| महीना 2 | ₹542 | ₹193 | ₹13,924 |
| महीना 3 | ₹549 | ₹186 | ₹13,375 |
| महीना 4 | ₹556 | ₹178 | ₹12,819 |
| महीना 5 | ₹564 | ₹171 | ₹12,256 |
| महीना 6 | ₹571 | ₹163 | ₹11,685 |
| महीना 7 | ₹579 | ₹156 | ₹11,106 |
| महीना 8 | ₹586 | ₹148 | ₹10,519 |
| महीना 9 | ₹594 | ₹140 | ₹9,925 |
| महीना 10 | ₹602 | ₹132 | ₹9,323 |
| महीना 11 | ₹610 | ₹124 | ₹8,713 |
| महीना 12 | ₹618 | ₹116 | ₹8,095 |
| महीना 13 | ₹627 | ₹108 | ₹7,468 |
| महीना 14 | ₹635 | ₹100 | ₹6,833 |
| महीना 15 | ₹643 | ₹91 | ₹6,190 |
| महीना 16 | ₹652 | ₹83 | ₹5,538 |
| महीना 17 | ₹661 | ₹74 | ₹4,878 |
| महीना 18 | ₹669 | ₹65 | ₹4,208 |
| महीना 19 | ₹678 | ₹56 | ₹3,530 |
| महीना 20 | ₹687 | ₹47 | ₹2,842 |
| महीना 21 | ₹697 | ₹38 | ₹2,146 |
| महीना 22 | ₹706 | ₹29 | ₹1,440 |
| महीना 23 | ₹715 | ₹19 | ₹725 |
| महीना 24 | ₹725 | ₹10 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹200 और आख़िरी का लगभग ₹10। आधा लोन लगभग महीना 13 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹15,000 दूसरी अवधियों में
18 महीने चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹655 ब्याज बचता है।
2 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹734 की EMI लगभग ₹2,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

