अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹15,000 की 18 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹901 | ₹1,215 | ₹16,215 |
| 12% | ₹915 | ₹1,465 | ₹16,465 |
| 14% | ₹929 | ₹1,717 | ₹16,717 |
| 16% | ₹943 | ₹1,971 | ₹16,971 |
| 18% | ₹957 | ₹2,228 | ₹17,228 |
| 20% | ₹971 | ₹2,486 | ₹17,486 |
| 22% | ₹986 | ₹2,747 | ₹17,747 |
| 24% | ₹1,001 | ₹3,010 | ₹18,010 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹743 | ₹200 | ₹14,257 |
| महीना 2 | ₹753 | ₹190 | ₹13,504 |
| महीना 3 | ₹763 | ₹180 | ₹12,742 |
| महीना 4 | ₹773 | ₹170 | ₹11,969 |
| महीना 5 | ₹783 | ₹160 | ₹11,185 |
| महीना 6 | ₹794 | ₹149 | ₹10,392 |
| महीना 7 | ₹804 | ₹139 | ₹9,587 |
| महीना 8 | ₹815 | ₹128 | ₹8,772 |
| महीना 9 | ₹826 | ₹117 | ₹7,946 |
| महीना 10 | ₹837 | ₹106 | ₹7,110 |
| महीना 11 | ₹848 | ₹95 | ₹6,262 |
| महीना 12 | ₹859 | ₹83 | ₹5,402 |
| महीना 13 | ₹871 | ₹72 | ₹4,531 |
| महीना 14 | ₹882 | ₹60 | ₹3,649 |
| महीना 15 | ₹894 | ₹49 | ₹2,755 |
| महीना 16 | ₹906 | ₹37 | ₹1,849 |
| महीना 17 | ₹918 | ₹25 | ₹930 |
| महीना 18 | ₹930 | ₹12 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹200 और आख़िरी का लगभग ₹12। आधा लोन लगभग महीना 10 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹15,000 दूसरी अवधियों में
1 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹640 ब्याज बचता है। 2 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹655 ब्याज बढ़ जाता है।
18 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹10,000 | ₹629 | ₹1,314 |
| ₹15,000 | ₹943 | ₹1,971 |
| ₹20,000 | ₹1,257 | ₹2,628 |
| ₹25,000 | ₹1,571 | ₹3,285 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹943 की EMI लगभग ₹2,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

