अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹20 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹64,534 | ₹3,23,237 | ₹23,23,237 |
| 12% | ₹66,429 | ₹3,91,430 | ₹23,91,430 |
| 14% | ₹68,355 | ₹4,60,789 | ₹24,60,789 |
| 16% | ₹70,314 | ₹5,31,306 | ₹25,31,306 |
| 18% | ₹72,305 | ₹6,02,972 | ₹26,02,972 |
| 20% | ₹74,327 | ₹6,75,778 | ₹26,75,778 |
| 22% | ₹76,381 | ₹7,49,713 | ₹27,49,713 |
| 24% | ₹78,466 | ₹8,24,765 | ₹28,24,765 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹5,88,831 | ₹2,08,312 | ₹14,11,169 |
| साल 2 | ₹6,63,510 | ₹1,33,634 | ₹7,47,659 |
| साल 3 | ₹7,47,659 | ₹49,484 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹2,08,312 और आख़िरी का लगभग ₹49,484। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹20 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹1,77,698 | ₹1,32,371 |
| 2 साल | ₹94,147 | ₹2,59,527 |
| 3 साल | ₹66,429 | ₹3,91,430 |
| 5 साल | ₹44,489 | ₹6,69,334 |
| 7 साल | ₹35,305 | ₹9,65,659 |
| 10 साल | ₹28,694 | ₹14,43,303 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹1,31,904 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹2,77,903 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹12 लाख | ₹39,857 | ₹2,34,858 |
| ₹15 लाख | ₹49,821 | ₹2,93,573 |
| ₹20 लाख | ₹66,429 | ₹3,91,430 |
| ₹25 लाख | ₹83,036 | ₹4,89,288 |
| ₹30 लाख | ₹99,643 | ₹5,87,145 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹66,429 की EMI लगभग ₹1,33,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

