अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹12 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹38,721 | ₹1,93,942 | ₹13,93,942 |
| 12% | ₹39,857 | ₹2,34,858 | ₹14,34,858 |
| 14% | ₹41,013 | ₹2,76,474 | ₹14,76,474 |
| 16% | ₹42,188 | ₹3,18,784 | ₹15,18,784 |
| 18% | ₹43,383 | ₹3,61,783 | ₹15,61,783 |
| 20% | ₹44,596 | ₹4,05,467 | ₹16,05,467 |
| 22% | ₹45,829 | ₹4,49,828 | ₹16,49,828 |
| 24% | ₹47,079 | ₹4,94,859 | ₹16,94,859 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
12% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹3,53,299 | ₹1,24,987 | ₹8,46,701 |
| साल 2 | ₹3,98,106 | ₹80,180 | ₹4,48,596 |
| साल 3 | ₹4,48,596 | ₹29,691 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,24,987 और आख़िरी का लगभग ₹29,691। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹12 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹1,06,619 | ₹79,423 |
| 2 साल | ₹56,488 | ₹1,55,716 |
| 3 साल | ₹39,857 | ₹2,34,858 |
| 5 साल | ₹26,693 | ₹4,01,600 |
| 7 साल | ₹21,183 | ₹5,79,395 |
| 10 साल | ₹17,217 | ₹8,65,982 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹79,142 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹1,66,742 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹8 लाख | ₹26,571 | ₹1,56,572 |
| ₹10 लाख | ₹33,214 | ₹1,95,715 |
| ₹12 लाख | ₹39,857 | ₹2,34,858 |
| ₹15 लाख | ₹49,821 | ₹2,93,573 |
| ₹20 लाख | ₹66,429 | ₹3,91,430 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹39,857 की EMI लगभग ₹80,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

