अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹80,000 की 6 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹13,725 | ₹2,349 | ₹82,349 |
| 12% | ₹13,804 | ₹2,823 | ₹82,823 |
| 14% | ₹13,883 | ₹3,298 | ₹83,298 |
| 16% | ₹13,962 | ₹3,775 | ₹83,775 |
| 18% | ₹14,042 | ₹4,252 | ₹84,252 |
| 20% | ₹14,122 | ₹4,731 | ₹84,731 |
| 22% | ₹14,202 | ₹5,211 | ₹85,211 |
| 24% | ₹14,282 | ₹5,692 | ₹85,692 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹12,896 | ₹1,067 | ₹67,104 |
| महीना 2 | ₹13,068 | ₹895 | ₹54,037 |
| महीना 3 | ₹13,242 | ₹720 | ₹40,795 |
| महीना 4 | ₹13,418 | ₹544 | ₹27,376 |
| महीना 5 | ₹13,597 | ₹365 | ₹13,779 |
| महीना 6 | ₹13,779 | ₹184 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,067 और आख़िरी का लगभग ₹184। आधा लोन लगभग महीना 4 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹80,000 दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 6 महीने | ₹13,962 | ₹3,775 |
| 1 साल | ₹7,258 | ₹7,102 |
| 18 महीने | ₹5,029 | ₹10,513 |
| 2 साल | ₹3,917 | ₹14,009 |
| 3 साल | ₹2,813 | ₹21,252 |
| 4 साल | ₹2,267 | ₹28,827 |
1 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹3,327 ब्याज बढ़ जाता है।
6 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹60,000 | ₹10,472 | ₹2,831 |
| ₹75,000 | ₹13,090 | ₹3,539 |
| ₹80,000 | ₹13,962 | ₹3,775 |
| ₹1 लाख | ₹17,453 | ₹4,718 |
| ₹1.5 लाख | ₹26,180 | ₹7,077 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹13,962 की EMI लगभग ₹28,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

