अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹80,000 की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹2,029 | ₹17,392 | ₹97,392 |
| 12% | ₹2,107 | ₹21,122 | ₹1,01,122 |
| 14% | ₹2,186 | ₹24,934 | ₹1,04,934 |
| 16% | ₹2,267 | ₹28,827 | ₹1,08,827 |
| 18% | ₹2,350 | ₹32,800 | ₹1,12,800 |
| 20% | ₹2,434 | ₹36,853 | ₹1,16,853 |
| 22% | ₹2,520 | ₹40,983 | ₹1,20,983 |
| 24% | ₹2,608 | ₹45,191 | ₹1,25,191 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹15,512 | ₹11,695 | ₹64,488 |
| साल 2 | ₹18,184 | ₹9,023 | ₹46,305 |
| साल 3 | ₹21,316 | ₹5,890 | ₹24,988 |
| साल 4 | ₹24,988 | ₹2,218 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹11,695 और आख़िरी का लगभग ₹2,218। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹80,000 दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 6 महीने | ₹13,962 | ₹3,775 |
| 1 साल | ₹7,258 | ₹7,102 |
| 18 महीने | ₹5,029 | ₹10,513 |
| 2 साल | ₹3,917 | ₹14,009 |
| 3 साल | ₹2,813 | ₹21,252 |
| 4 साल | ₹2,267 | ₹28,827 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹7,574 ब्याज बचता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹60,000 | ₹1,700 | ₹21,620 |
| ₹75,000 | ₹2,126 | ₹27,025 |
| ₹80,000 | ₹2,267 | ₹28,827 |
| ₹1 लाख | ₹2,834 | ₹36,033 |
| ₹1.5 लाख | ₹4,251 | ₹54,050 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹2,267 की EMI लगभग ₹5,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

