अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹75,000 की 6 महीने की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹12,867 | ₹2,203 | ₹77,203 |
| 12% | ₹12,941 | ₹2,647 | ₹77,647 |
| 14% | ₹13,015 | ₹3,092 | ₹78,092 |
| 16% | ₹13,090 | ₹3,539 | ₹78,539 |
| 18% | ₹13,164 | ₹3,986 | ₹78,986 |
| 20% | ₹13,239 | ₹4,435 | ₹79,435 |
| 22% | ₹13,314 | ₹4,885 | ₹79,885 |
| 24% | ₹13,389 | ₹5,337 | ₹80,337 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर महीने-दर-महीने भुगतान
| महीना | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| महीना 1 | ₹12,090 | ₹1,000 | ₹62,910 |
| महीना 2 | ₹12,251 | ₹839 | ₹50,659 |
| महीना 3 | ₹12,414 | ₹675 | ₹38,245 |
| महीना 4 | ₹12,580 | ₹510 | ₹25,665 |
| महीना 5 | ₹12,748 | ₹342 | ₹12,918 |
| महीना 6 | ₹12,918 | ₹172 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹1,000 और आख़िरी का लगभग ₹172। आधा लोन लगभग महीना 4 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹75,000 दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 6 महीने | ₹13,090 | ₹3,539 |
| 1 साल | ₹6,805 | ₹6,658 |
| 18 महीने | ₹4,714 | ₹9,856 |
| 2 साल | ₹3,672 | ₹13,134 |
| 3 साल | ₹2,637 | ₹19,924 |
| 4 साल | ₹2,126 | ₹27,025 |
1 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹3,119 ब्याज बढ़ जाता है।
6 महीने के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹50,000 | ₹8,727 | ₹2,359 |
| ₹60,000 | ₹10,472 | ₹2,831 |
| ₹75,000 | ₹13,090 | ₹3,539 |
| ₹80,000 | ₹13,962 | ₹3,775 |
| ₹1 लाख | ₹17,453 | ₹4,718 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹13,090 की EMI लगभग ₹27,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

