अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹3 लाख की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹7,609 | ₹65,221 | ₹3,65,221 |
| 12% | ₹7,900 | ₹79,207 | ₹3,79,207 |
| 14% | ₹8,198 | ₹93,501 | ₹3,93,501 |
| 16% | ₹8,502 | ₹1,08,100 | ₹4,08,100 |
| 18% | ₹8,812 | ₹1,23,000 | ₹4,23,000 |
| 20% | ₹9,129 | ₹1,38,197 | ₹4,38,197 |
| 22% | ₹9,452 | ₹1,53,688 | ₹4,53,688 |
| 24% | ₹9,781 | ₹1,69,466 | ₹4,69,466 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹60,137 | ₹38,238 | ₹2,39,863 |
| साल 2 | ₹69,118 | ₹29,257 | ₹1,70,745 |
| साल 3 | ₹79,440 | ₹18,935 | ₹91,304 |
| साल 4 | ₹91,304 | ₹7,071 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹38,238 और आख़िरी का लगभग ₹7,071। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹3 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹26,936 | ₹23,234 |
| 2 साल | ₹14,404 | ₹45,693 |
| 3 साल | ₹10,253 | ₹69,118 |
| 4 साल | ₹8,198 | ₹93,501 |
| 5 साल | ₹6,980 | ₹1,18,829 |
| 7 साल | ₹5,622 | ₹1,72,248 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹24,383 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹25,327 ब्याज बढ़ जाता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹2 लाख | ₹5,465 | ₹62,334 |
| ₹2.5 लाख | ₹6,832 | ₹77,918 |
| ₹3 लाख | ₹8,198 | ₹93,501 |
| ₹4 लाख | ₹10,931 | ₹1,24,668 |
| ₹5 लाख | ₹13,663 | ₹1,55,835 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹8,198 की EMI लगभग ₹17,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

