अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹3 लाख की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹9,680 | ₹48,486 | ₹3,48,486 |
| 12% | ₹9,964 | ₹58,715 | ₹3,58,715 |
| 14% | ₹10,253 | ₹69,118 | ₹3,69,118 |
| 16% | ₹10,547 | ₹79,696 | ₹3,79,696 |
| 18% | ₹10,846 | ₹90,446 | ₹3,90,446 |
| 20% | ₹11,149 | ₹1,01,367 | ₹4,01,367 |
| 22% | ₹11,457 | ₹1,12,457 | ₹4,12,457 |
| 24% | ₹11,770 | ₹1,23,715 | ₹4,23,715 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹86,447 | ₹36,592 | ₹2,13,553 |
| साल 2 | ₹99,357 | ₹23,682 | ₹1,14,196 |
| साल 3 | ₹1,14,196 | ₹8,844 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹36,592 और आख़िरी का लगभग ₹8,844। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹3 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹26,936 | ₹23,234 |
| 2 साल | ₹14,404 | ₹45,693 |
| 3 साल | ₹10,253 | ₹69,118 |
| 4 साल | ₹8,198 | ₹93,501 |
| 5 साल | ₹6,980 | ₹1,18,829 |
| 7 साल | ₹5,622 | ₹1,72,248 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹23,426 ब्याज बचता है। 4 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹24,383 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹2 लाख | ₹6,836 | ₹46,079 |
| ₹2.5 लाख | ₹8,544 | ₹57,599 |
| ₹3 लाख | ₹10,253 | ₹69,118 |
| ₹4 लाख | ₹13,671 | ₹92,158 |
| ₹5 लाख | ₹17,089 | ₹1,15,197 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹10,253 की EMI लगभग ₹21,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

