अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹2 लाख की 4 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹5,073 | ₹43,481 | ₹2,43,481 |
| 12% | ₹5,267 | ₹52,805 | ₹2,52,805 |
| 14% | ₹5,465 | ₹62,334 | ₹2,62,334 |
| 16% | ₹5,668 | ₹72,067 | ₹2,72,067 |
| 18% | ₹5,875 | ₹82,000 | ₹2,82,000 |
| 20% | ₹6,086 | ₹92,131 | ₹2,92,131 |
| 22% | ₹6,301 | ₹1,02,458 | ₹3,02,458 |
| 24% | ₹6,520 | ₹1,12,978 | ₹3,12,978 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹40,091 | ₹25,492 | ₹1,59,909 |
| साल 2 | ₹46,079 | ₹19,505 | ₹1,13,830 |
| साल 3 | ₹52,960 | ₹12,623 | ₹60,869 |
| साल 4 | ₹60,869 | ₹4,714 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹25,492 और आख़िरी का लगभग ₹4,714। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹2 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹17,957 | ₹15,489 |
| 2 साल | ₹9,603 | ₹30,462 |
| 3 साल | ₹6,836 | ₹46,079 |
| 4 साल | ₹5,465 | ₹62,334 |
| 5 साल | ₹4,654 | ₹79,219 |
| 7 साल | ₹3,748 | ₹1,14,832 |
3 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹16,255 ब्याज बचता है। 5 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹16,885 ब्याज बढ़ जाता है।
4 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹1 लाख | ₹2,733 | ₹31,167 |
| ₹1.5 लाख | ₹4,099 | ₹46,751 |
| ₹2 लाख | ₹5,465 | ₹62,334 |
| ₹2.5 लाख | ₹6,832 | ₹77,918 |
| ₹3 लाख | ₹8,198 | ₹93,501 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹5,465 की EMI लगभग ₹11,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

