अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹2 लाख की 5 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹4,249 | ₹54,965 | ₹2,54,965 |
| 12% | ₹4,449 | ₹66,933 | ₹2,66,933 |
| 14% | ₹4,654 | ₹79,219 | ₹2,79,219 |
| 16% | ₹4,864 | ₹91,817 | ₹2,91,817 |
| 18% | ₹5,079 | ₹1,04,721 | ₹3,04,721 |
| 20% | ₹5,299 | ₹1,17,927 | ₹3,17,927 |
| 22% | ₹5,524 | ₹1,31,427 | ₹3,31,427 |
| 24% | ₹5,754 | ₹1,45,216 | ₹3,45,216 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹29,702 | ₹26,142 | ₹1,70,298 |
| साल 2 | ₹34,138 | ₹21,706 | ₹1,36,161 |
| साल 3 | ₹39,236 | ₹16,608 | ₹96,925 |
| साल 4 | ₹45,095 | ₹10,749 | ₹51,830 |
| साल 5 | ₹51,830 | ₹4,014 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹26,142 और आख़िरी का लगभग ₹4,014। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹2 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹17,957 | ₹15,489 |
| 2 साल | ₹9,603 | ₹30,462 |
| 3 साल | ₹6,836 | ₹46,079 |
| 4 साल | ₹5,465 | ₹62,334 |
| 5 साल | ₹4,654 | ₹79,219 |
| 7 साल | ₹3,748 | ₹1,14,832 |
4 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹16,885 ब्याज बचता है। 7 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹35,613 ब्याज बढ़ जाता है।
5 साल के लिए आस-पास की रकम
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹4,654 की EMI लगभग ₹10,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

