अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹2.5 लाख की 5 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹5,312 | ₹68,706 | ₹3,18,706 |
| 12% | ₹5,561 | ₹83,667 | ₹3,33,667 |
| 14% | ₹5,817 | ₹99,024 | ₹3,49,024 |
| 16% | ₹6,080 | ₹1,14,771 | ₹3,64,771 |
| 18% | ₹6,348 | ₹1,30,901 | ₹3,80,901 |
| 20% | ₹6,623 | ₹1,47,408 | ₹3,97,408 |
| 22% | ₹6,905 | ₹1,64,284 | ₹4,14,284 |
| 24% | ₹7,192 | ₹1,81,519 | ₹4,31,519 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹37,127 | ₹32,678 | ₹2,12,873 |
| साल 2 | ₹42,672 | ₹27,133 | ₹1,70,201 |
| साल 3 | ₹49,045 | ₹20,760 | ₹1,21,156 |
| साल 4 | ₹56,369 | ₹13,436 | ₹64,787 |
| साल 5 | ₹64,787 | ₹5,017 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹32,678 और आख़िरी का लगभग ₹5,017। आधा लोन लगभग साल 3 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹2.5 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹22,447 | ₹19,361 |
| 2 साल | ₹12,003 | ₹38,077 |
| 3 साल | ₹8,544 | ₹57,599 |
| 4 साल | ₹6,832 | ₹77,918 |
| 5 साल | ₹5,817 | ₹99,024 |
| 7 साल | ₹4,685 | ₹1,43,540 |
4 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹21,106 ब्याज बचता है। 7 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹44,516 ब्याज बढ़ जाता है।
5 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹2 लाख | ₹4,654 | ₹79,219 |
| ₹2.5 लाख | ₹5,817 | ₹99,024 |
| ₹3 लाख | ₹6,980 | ₹1,18,829 |
| ₹4 लाख | ₹9,307 | ₹1,58,438 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹5,817 की EMI लगभग ₹12,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

