ज़्यादातर बिज़नेस में पैसा अटका रहता है — माल गोदाम में, उधारी ग्राहकों के पास — जबकि सप्लायर, किराया और सैलरी समय पर देने होते हैं। इस अंतर को भरने वाला लोन है वर्किंग कैपिटल लोन।
किसके लिए
- स्टॉक और कच्चा माल ख़रीदना
- त्योहार या सीज़न से पहले माल भरना
- ग्राहकों से पेमेंट आने तक का अंतर
- सैलरी, किराया और बिजली जैसे नियमित ख़र्च
प्रकार
| प्रकार | कैसे काम करता है |
|---|---|
| ओवरड्राफ़्ट / कैश क्रेडिट | एक लिमिट मिलती है; जितना इस्तेमाल करें, उतने पर और उतने दिन का ब्याज |
| शॉर्ट-टर्म लोन | तय रकम, कुछ महीनों से एक-दो साल में EMI से वापसी |
| इनवॉइस फ़ाइनेंसिंग | बकाया बिलों के बदले पैसा, ग्राहक के पेमेंट पर चुकता |
टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल?
मशीन या दुकान की सजावट जैसी एक बार की ख़रीद, जो सालों चले, उसके लिए टर्म लोन ठीक है। घटते-बढ़ते स्टॉक और उधारी के लिए वर्किंग कैपिटल बेहतर है, क्योंकि आप आम तौर पर सिर्फ़ इस्तेमाल की गई रकम पर ब्याज देते हैं।
लेंडर क्या देखते हैं
- बैंक स्टेटमेंट में नियमित क्रेडिट और बिक्री का चक्र
- GST रिटर्न से टर्नओवर
- स्टॉक और उधारी का स्तर
- चल रहे कर्ज़ और भुगतान रिकॉर्ड
सुझाव
- सीज़न से पहले ही आवेदन करें, ताकि ज़रूरत के समय लिमिट तैयार हो।
- लिमिट सिर्फ़ ज़रूरत भर इस्तेमाल करें और जल्दी चुकाएँ — ब्याज बचेगा।
- बिज़नेस लोन EMI कैलकुलेटर से भुगतान की योजना बनाएँ।

