भारत में करोड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) हैं — किराना दुकानें, वर्कशॉप, छोटे कारख़ाने, सेवा देने वाले बिज़नेस। MSME लोन इन्हीं के लिए हैं।
MSME कौन है
1 अप्रैल 2025 से लागू सीमाओं के अनुसार (निवेश और टर्नओवर दोनों):
| श्रेणी | प्लांट/मशीनरी में निवेश | सालाना टर्नओवर |
|---|---|---|
| सूक्ष्म (Micro) | ₹2.5 करोड़ तक | ₹10 करोड़ तक |
| लघु (Small) | ₹25 करोड़ तक | ₹100 करोड़ तक |
| मध्यम (Medium) | ₹125 करोड़ तक | ₹500 करोड़ तक |
उद्यम रजिस्ट्रेशन (मुफ़्त, ऑनलाइन) से आपका बिज़नेस आधिकारिक रूप से MSME माना जाता है।
MSME लोन के प्रकार
- टर्म लोन — मशीन, विस्तार या नई यूनिट जैसी एक बार की ज़रूरत के लिए, तय EMI में।
- वर्किंग कैपिटल — स्टॉक, कच्चा माल और उधारी के लिए; अक्सर क्रेडिट लाइन या ओवरड्राफ़्ट। देखें वर्किंग कैपिटल लोन।
- बिना गिरवी लोन — टर्नओवर और बैंकिंग के आधार पर। देखें बिना गिरवी बिज़नेस लोन।
मददगार सरकारी योजनाएँ
- मुद्रा (PMMY) — सूक्ष्म उद्यमों के लिए: शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000–₹5 लाख), तरुण (₹5–10 लाख) और तरुण प्लस (₹10–20 लाख, सिर्फ़ तरुण लोन चुका चुके उद्यमियों के लिए)। पढ़ें मुद्रा लोन क्या है।
- CGTMSE — सदस्य लेंडर सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बिना गिरवी लोन दे सकते हैं; 1 अप्रैल 2025 से कवर ₹10 करोड़ तक।
ये योजनाएँ बैंक, NBFC और MFI के ज़रिए चलती हैं; आवेदन पर फ़ैसला लेंडर करता है।
लेंडर क्या देखते हैं
बिज़नेस का विंटेज, टर्नओवर, बैंक स्टेटमेंट, GST/ITR, चल रहे कर्ज़ और मालिक का क्रेडिट रिकॉर्ड। पूरी जानकारी: योग्यता और दस्तावेज़।

