अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹60,000 की 3 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹1,936 | ₹9,697 | ₹69,697 |
| 12% | ₹1,993 | ₹11,743 | ₹71,743 |
| 14% | ₹2,051 | ₹13,824 | ₹73,824 |
| 16% | ₹2,109 | ₹15,939 | ₹75,939 |
| 18% | ₹2,169 | ₹18,089 | ₹78,089 |
| 20% | ₹2,230 | ₹20,273 | ₹80,273 |
| 22% | ₹2,291 | ₹22,491 | ₹82,491 |
| 24% | ₹2,354 | ₹24,743 | ₹84,743 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
16% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹16,918 | ₹8,395 | ₹43,082 |
| साल 2 | ₹19,833 | ₹5,480 | ₹23,249 |
| साल 3 | ₹23,249 | ₹2,064 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹8,395 और आख़िरी का लगभग ₹2,064। आधा लोन लगभग साल 2 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹60,000 दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 6 महीने | ₹10,472 | ₹2,831 |
| 1 साल | ₹5,444 | ₹5,326 |
| 18 महीने | ₹3,771 | ₹7,885 |
| 2 साल | ₹2,938 | ₹10,507 |
| 3 साल | ₹2,109 | ₹15,939 |
| 4 साल | ₹1,700 | ₹21,620 |
2 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹5,432 ब्याज बचता है। 4 साल करने से EMI घटती है, लेकिन लगभग ₹5,681 ब्याज बढ़ जाता है।
3 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹50,000 | ₹1,758 | ₹13,283 |
| ₹60,000 | ₹2,109 | ₹15,939 |
| ₹75,000 | ₹2,637 | ₹19,924 |
| ₹80,000 | ₹2,813 | ₹21,252 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹2,109 की EMI लगभग ₹5,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

