अलग-अलग ब्याज दरों पर ₹4 लाख की 7 साल की EMI
| ब्याज दर (सालाना) | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹6,640 | ₹1,57,800 | ₹5,57,800 |
| 12% | ₹7,061 | ₹1,93,132 | ₹5,93,132 |
| 14% | ₹7,496 | ₹2,29,664 | ₹6,29,664 |
| 16% | ₹7,945 | ₹2,67,365 | ₹6,67,365 |
| 18% | ₹8,407 | ₹3,06,199 | ₹7,06,199 |
| 20% | ₹8,882 | ₹3,46,128 | ₹7,46,128 |
| 22% | ₹9,370 | ₹3,87,112 | ₹7,87,112 |
| 24% | ₹9,870 | ₹4,29,107 | ₹8,29,107 |
यह रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूले से निकाली गई है। दरें सिर्फ़ तुलना के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं; प्रोसेसिंग फ़ीस और GST अलग से लगते हैं और लेंडर के Key Fact Statement में दिखते हैं।
14% पर साल-दर-साल भुगतान
| साल | चुकाया मूलधन | चुकाया ब्याज | बचा बकाया |
|---|---|---|---|
| साल 1 | ₹36,218 | ₹53,734 | ₹3,63,782 |
| साल 2 | ₹41,626 | ₹48,326 | ₹3,22,156 |
| साल 3 | ₹47,843 | ₹42,109 | ₹2,74,313 |
| साल 4 | ₹54,988 | ₹34,964 | ₹2,19,325 |
| साल 5 | ₹63,200 | ₹26,752 | ₹1,56,125 |
| साल 6 | ₹72,638 | ₹17,314 | ₹83,486 |
| साल 7 | ₹83,486 | ₹6,466 | ₹0 |
ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज़्यादातर ब्याज और बाद की EMI में ज़्यादातर मूलधन होता है: पहले हिस्से का ब्याज लगभग ₹53,734 और आख़िरी का लगभग ₹6,466। आधा लोन लगभग साल 5 तक चुक जाता है। अवधि की शुरुआत में आंशिक प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
₹4 लाख दूसरी अवधियों में
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹35,915 | ₹30,978 |
| 2 साल | ₹19,205 | ₹60,924 |
| 3 साल | ₹13,671 | ₹92,158 |
| 4 साल | ₹10,931 | ₹1,24,668 |
| 5 साल | ₹9,307 | ₹1,58,438 |
| 7 साल | ₹7,496 | ₹2,29,664 |
5 साल चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन लगभग ₹71,226 ब्याज बचता है।
7 साल के लिए आस-पास की रकम
| लोन की रकम | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| ₹2.5 लाख | ₹4,685 | ₹1,43,540 |
| ₹3 लाख | ₹5,622 | ₹1,72,248 |
| ₹4 लाख | ₹7,496 | ₹2,29,664 |
| ₹5 लाख | ₹9,370 | ₹2,87,080 |
| ₹6 लाख | ₹11,244 | ₹3,44,497 |
इस EMI के लिए कितनी आय चाहिए?
कई लेंडर चाहते हैं कि आपकी सभी EMI मासिक टेक-होम आय के लगभग आधे के अंदर रहें। कोई और EMI न हो तो ₹7,496 की EMI लगभग ₹15,000 महीने की आय के आधे में फ़िट होती है। लेंडर अपनी न्यूनतम आय भी तय करते हैं, जो अक्सर इससे ज़्यादा होती है, और CIBIL स्कोर व बैंकिंग भी देखते हैं — इसे मोटा अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
इस लोन पर कम कैसे चुकाएँ
- ऑफ़र की तुलना सिर्फ़ ब्याज दर पर नहीं, Key Fact Statement में लिखे APR पर करें।
- देखें कि दर रिड्यूसिंग है, फ़्लैट नहीं — फ़्लैट दर कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती है।
- सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI हर महीने आराम से भर सकें।
- जब हो सके प्रीपेमेंट करें — शुरुआती प्रीपेमेंट से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। पहले प्रीपेमेंट शुल्क देख लें।
- CIBIL स्कोर अच्छा रखें — बेहतर स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।

